Monday, 7 October 2013

याद है वो बुढ़िया , हाँ वही जिसकी  बूढी आंखे   किसी के इंतज़ार में रहती थी हर पल हर घडी I उसका ह्रदय भरा था उसकी यादों से , वो बस एक नजर देख लेना चाहती थी उसको I उसके पास समय भी तो  कम था और फिर जिस बेटे का वो इंतज़ार कर रही थी शायद वो भी तो भूल चूका था अपनी माँ को I रवि नाम था उसका , उम्र थी २८ साल , दिल्ली में बहुअन्तरत्श्रिय कंपनी में कार्यरत था I लगभग ५ साल पहले जब उसकी नौकरी लगी तो उसकी माँ ख़ुशी से फुले नही समां रही थी क्योकि उसे अनुभूति नह थी की ये शहर उससे उसका जीना का एक मात्र सहारा भी छीन लेगी 

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